गोपाल राय का मुख्य चुनाव आयुक्त एके जोती पर जोरदार हमला

आईएनएन भारत

चुनाव आयोग द्वारा आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को लाभ के पद के मामले में अयोग्य करार किये जाने के बाद 22 जनवरी को रिटायर होने वाले मुख्य चुनाव अब आप नेताओं के निशाने पर आ गये हैं। आयोग ने राष्ट्रपति से उनकी सदस्यता खत्म करने की सिफारिश तो कर दी है परंतु आयोग के खिलाफ भी हमले तेज हो गये हैं। ईवीएम मशीन को लेकर पहले से ही संशय की नजर से देखे जा रहे मुख्य चुनाव आयुक्त के इस कदम से उनके फैसलों पर फिर से सवालिया निशान लगने लगे हैं।

इस मामले में बेशक केजरीवाल ने चुप्पी साध रखी हो परंतु उनके सहयोगी आयोग के इस फैसले को लोकतंत्र के लिए बड़ा झटका बता रहे हैं। केजरीवाल सरकार में श्रम एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल राय ने आज चुनाव आयोग पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि एनडीए सरकार दिल्ली की जनता से बदला ले रही है। उन्होंने केन्द्र सरकार की तुलना ब्रिटिश दौर से करते हुए कहा कि इतना अंधेरा तो ब्रिटिश शासनकाल में भी नहीं था।

गोपाल राय ने कहा कि सभी बुद्धिजीवी और राजनीतिक लोग हैरान है कि दो दिन बाद रिटायर होने वाले मुख्य चुनाव आयुक्त एके ज्योति ने आप विधायकों की सदस्यता रद्द करने का फैसला किस दबाव में लिया? वैसे प्रधानमंत्री मोदी के साथ एके जोती के संबंधो पर सवाल मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के समय से ही उठते रहे हैं।
दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय ने कहा कि चुनाव आयोग ने अंतिम बार 23 जून को बुलाया था। उसके बाद आज तक आयोग ने नहीं बुलाया। एके जोती पर ऐसे आरोप पहली बार नहीं लगे हैं। वे पीएम मोदी के खास रहे हैं। मीडिया में फैलाया जा रहा है कि चुनाव आयोग के कई बार बुलाने के बाद भी आप के विधायक पेश नहीं हुए। जोकि सरासर झूठ है।

गोपाल राय ने मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि ये ऐतिहासिक मोदी राज है। मोदी राज में ऐसा पहली बार नही हुआ कि किसी केस पर बिना सुनवाई के फैसला सुना दिया गया हो।
संजय सिंह ने भी मोर्चा खोला
आप के टिकट पर राज्यसभा जाने की तैयारी कर रहे वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने 20 विधायकों के खिलाफ चुनाव आयोग के फैसले को गलत करार दिया है। उनके मुताबिक, ये लोकतंत्र का गला घोंटने वाली कार्रवाई है। संजय सिंह ने कहा कि आयोग ने पीएम मोदी के साथ वफादारी निभाई है। खुद लाभ लेने वाले चुनाव आयुक्त एके ज्योति आज लाभ के पद का पहाड़ा पढ़ा रहे हैं।

संजय सिंह के मुताबिक, कई राज्यों में संसदीय सचिवों की नियुक्तियां रद्द हुई, लेकिन सदस्यता रद्द नहीं हुई। दिल्ली में ऐसा क्यों किया जा रहा है? हमने कोई लाभ नहीं लिया, हम बीजेपी की आंख की किरकिरी हैं।
संजय सिंह ने कहा कि इन संसदीय सचिवों ने सरकारी गाड़ी का प्रयोग किया। सरकार के कार्य के लिए सरकारी गाड़ी का प्रयोग लाभ के पद में नहीं आता। उन्होंने कहा कि अगर मनोज तिवारी को इस्तीफा मांगना ही है, तो पहले पीएम का इस्तीफा मांगे, क्योंकि सबसे पहले गुजरात में उनके समय में ही संसदीय सचिव बनाए गए थे। जिन्हें उप-मंत्री का दर्जा दिया गया और सारी सुविधाएं दी गईं।

कांग्रेस और बीजेपी को निशाने पर लेते हुए संजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास आपातकाल का रहा है, ये बीजेपी के साथ मिलकर दिल्ली सरकार को रोकना चाहती है। आप नेता ने कहा कि जब दिल्ली हाईकोर्ट ने यह कह दिया था कि ये लोग संसदीय सचिव नहीं हैं, तो फिर अब चुनाव आयोग इन 20 विधायकों को लाभ का पद मामले में अयोग्य क्यों घोषित कर रहा है?

विश्वास ने भी जताई आपत्ति
दूसरी तरफ आप में असंतुष्ट माने जा रहे कुमार विश्वास ने भी चुनाव आयोग के फैसले पर आपत्ति जाहिर की है। विश्वास ने 20 विधायकों को अयोग्य करार देने के आयोग के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। विश्वास के मुताबिक, उन्होंने पार्टी को इस संबंध में पहले कुछ सुझाव दिए थे, लेकिन साथ उन्हें बताया गया कि यह सीएम का अधिकार है कि किसे नियुक्त करें और किसे नहीं।