जंगलराज उत्तर प्रदेश: दलितों के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न का भगवा मैदान

आईएनएन भारत डेस्क
लखनऊः उत्तर प्रदेश और देश के कई राज्यों में भाजपा-संघ के शासन आने के बाद लगता है कि दलित उत्पीड़न की दौड़ में शामिल हो गये हैं। समाज के कईं हिस्से दलितों पर हमले को अपना वर्चस्व प्रमाणित करने के लिए ना केवल एक औजार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं बल्कि यह सिद्ध करने पर उतारू हैं कि सामाजिक रूप से वंचित जातियों के लोग इंसान नही होते हैं अथवा दूसरे दर्जे के इंसान हैं जिन्हें कभी भी उत्पीड़ित करने और उनके खिलाफ हिंसा की आजादी ली जा सकती है। दरअसल, भगवा ब्रिगेड की राजनीति के सत्तासीन होने के बाद इन घटनाओं में उभार यह दर्शाता है कि ब्राहमणवादी भगवा राजनीति किस मानसिकता का शिकार है और इन घटनाओं को अंजाम देने वाले यह मानते हैं कि उनके मानस बंधु देश की सत्ता पर काबिज हैं और उनकी हिंसात्मक गतिविधियों का वह बचाव करेंगे। वास्तव में सामाजिक विभेद पर टिका हिंदुत्ववादी भगवा राजनीति के विचार और वर्चस्व के प्रभाव का विस्तार ही आज ऐसे तत्वों को उत्साहित कर रहा है। यह केवल भगवा राजनीति से जुड़े लोगों की ही मानसिकता नही है बल्कि उत्तर प्रदेश सरीखे राज्यों के पुलिस प्रशासन का व्यवहार भी इस मानसिकता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका अदा करता है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में दलित उत्पीड़न की दो घटनाऐं हुई जिन दोनों घटनाओं पर जिले के पुलिस अधीक्षक अनंत देव सिंह का व्यवहार दो तरह का था। एक घटना पुरकाजी थाना क्षेत्र में हुई और दूसरी घटना वलीपुरा गांव में पुलिस की दबिश के समय हुई। जिसमें बताया जाता है कि पुलिस ने दबिश के दौरान घर की महिलाओं के साथ मारपीट की और यहां तक कि उक्त घर की 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला के साथ मारपीट और अभ्रदता भी की। जब पुलिस ने वलीपुरा में दबिश की तो उनके साथ एक भी महिला पुलिसकर्मी नही थी। मुजफ्फरनगर की दोनों घटनाएं इस प्रकार हैः

पुरकाजी थाना क्षेत्र की घटना
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक दलित युवक को चार लोगों ने बुरी तरह से मारा और उसे ‘‘जय माता दी‘‘ बोलने पर मजबूर किया गया। इस घटना का कथित तौर पर वीडियो भी बनाया गया है। पुलिस इन चार लोगों की तलाश में जुट गई है।
राज्य पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। वरिश्ठ पुलिस अधीक्षक अनंत देव सिंह ने कहा की जिस दलित युवक् को मारा गया वह करीब 27 साल का है और पुरकाजी पुलिस स्टेशन में मामला दायर किया गया है। अनंत देव सिंह ने आगे कहा है कि हम पीड़ित और उनके परिवार के सदस्यों से बात कर रहे हैं और अभियुक्तों में से तीन-चार गुर्जर है। यह घटना पुरकाजी पुलिस स्टेशन क्षेत्र में हुई है।

 

मुजफ्फरनगर पुलिस के पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने कहा की, पुलिस टीम अभियुक्त को पकड़ने के लिए छापे मारने की तैयारी कर रही है। अभी तक एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। वीडियो में, एक काले हेलमेट पहने हुए, तीन व्यक्ति पीड़ित को पीट रहे हैं। वह लोग उस दलित युवक को ‘जय माता दी‘ और अन्य नारे का जप करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

वलीपुरा गांव की घटना
पुलिस की दबिश के दौरान गांव वलीपुरा में रविवार को बुजुर्ग महिलाओं व पुरुषों से मारपीट का मामला प्रकाश में आया है। मारपीट में लोग घायल हो गये। पुलिस की कार्यशैली पर भड़के लोग एसएसपी आवास पहुंचे और जोरदार नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया। देर रात मीरांपुर पुलिस गांव वलीपुरा में एक मकान में दबिश देनी गयी थी। पुलिस को एक आरोपी की तलाश थी। आरोप है कि पुलिस ने मकान में घुसते ही तोड़फोड़ करनी शुरु कर दी। परिवार की बुजुर्ग महिलाओं व पुरुषों ने विरोध किया तो पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। काफी देर तक पुलिस मकान में तांडव करती रही। परिवार के लोग घर में आरोपी के न होने की पुलिस को दुहाई देते रहे, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उनकी एक नहीं सुनी। दबिश के दौरान महिला पुलिसकर्मी साथ नहीं थी। पुलिस की अभद्रता को लेकर रविवार को गांव के लोग एसएसपी आवास पर पहुंचे। उनकी मुलाकात एसएसपी से नहीं हुई। ग्रामीणों ने एसएसपी आवास के बाहर खडे होकर प्रदर्शन भी किया। हालांकि इसके बाद भी किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ कोई कार्रवाई नही हुई है। संभवत यूपी के एनकांउटर स्पेशलिस्ट एसएसपी अनंत देव सिंह इस मारपीट और दलित परिवार पर पुलिस हमलें को भी पुलिस के अधिकार क्षेत्र का मामला ही मानते होंगे।