चीफ जस्टिस फुल कोर्ट मीटिंग बुलाकर इस मामले को सुलझाएं :सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने शनिवार को अपने पदाधिकारियों की एक बैठक बुलाई थी, जिसमे इस मामले में आगे का रास्ता क्या हो पर चर्चा कर तय किया जा सके। बैठक के बाद पदाधिकारियों ने बताया कि वो सुप्रीम कोर्ट के अन्य 23 न्यायमूर्तियों से मिलना चाहते हैं, जिसमें से अधिकांश चर्चा के लिए तैयार हैं। उसके बाद चारो असहमत जजों से मिलेंगे और अंत मे मुख्य न्यायाधीश से। ये बैठके रविवार से शुरू होगी।

आईएनएन भारत:
नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्तियों के बीच के विवादों को सुलझाने के दिशा में एक कदम बढ़ाते हुए कहा कि वो चाहते है कि मामले को आंतरिक रूप से ही सुलझा लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “शुक्रवार को एक अप्रत्याशित घटना घटी, जिसमे सर्वोच्च न्यायालय के 4 वरिष्ठतम न्यायमूर्तियों द्वारा मुख्य न्यायमूर्ति की आलोचना के लिए बुलाए गए संवादाता सम्मेलन से पूरा सिस्टम हिल गया है”। अधिवक्ता विकास सिंह, अध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा, “जजो द्वारा की गई प्रेस कांफ्रेंस काफी गंभीर हैं। बार आग्रह करती हैं कि सारी जनहित याचिकाएं, सोमवर से ही चीफ जस्टिस समेत वरिष्ठ जजों, जो कॉलेजियम के सदस्य है, उन्हें सुनवाई के लिए दी जाय”। एससीबीए ने बैठक में एक प्रस्ताव पास किया हैं। प्रस्ताव के अनुसार ये सुप्रीम कोर्ट के जजों के अंदरूनी मामला है, चीफ जस्टिस फुल कोर्ट मीटिंग बुलाकर इस मामले को सुलझाएं। सभी जनहित याचिकाएं चाहे वो नई हो या लंबित, सभी को पांच वरिष्ठ जजों की बेंच ही सुने

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के चैयरमैन अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ” हम नही चाहते कि ऐसे मामले सार्वजनिक रूप से हल किये जाए, इसे आंतरिक रूप से ही हल कर लिया जाना चाहिए। कैमरे के सामने आने से हमारा सिस्टम ही कमजोर होगा।

आपको बतादे कि इस शुक्रवार के देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जज मीडिया के सामने आए और कहा कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक से काम नही कर रहा हैं, और यदि संस्था को ठीक नही किया गया तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस जे. चेलमेश्वर ने, जस्टिस रंजन गोगोई,  जस्टिस मदन लोकूर और जस्टिस कुरियन जोसेफ के साथ मीडिया से कहा, हम चारों मीडिया का  शुक्रिया अदा करना चाहते हैं।  किसी भी देश के कानून के इतिहास में या बहुत बड़ा दिन भूतपूर्व घटना क्योंकि हमें यह ब्रीफिंग करने के लिए मजबूर होना पड़ा हैं।  उन्होंने कहा कि हमने यह प्रेस कांफ्रेंस इसलिए की ताकि हमें कोई यह ना कह सके कि हमने आत्मा को बेच दिया है।

भारत की जनता को इस प्रेस कांफ्रेंस ने यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वास्तव में कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है। कुछ तो ऐसा हो रहा था जिसके कारण सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ न्यायाधीश को बाहर निकल कर प्रेस कांफ्रेंस करना पड़ा। कुछ समय पहले जब जस्टिस करनन ने भ्रस्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज उठाए थे तो उन्हें 6 महीनों की सज़ा दे दी गई थी। कास ये चारों न्यायाधीश उस समय अपनी डिसेंडिंग व्यू दिए होते तो शायद इन्हें आज ये फिन नही देखना पड़ता।