कार्यस्थल पर महिला उत्पीडन रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दखल

आईएनएन भारत डेस्क:
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर कहा है
कि वे 2013 के कानून को उचित तरीके से लागु करें। ताकि कार्यस्थलों में महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने में मदद मिल सके।

 

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचुद की पीठ ने कार्यस्थल पर महिलाओं की यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध, निवारण) अधिनियम, 2013 के कार्यान्वयन के लिए एक एनजीओ द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान निर्देश जारी किया गया।

 

अपने न्यासी पल्लवी पारीक और ऐशा शेखर द्वारा प्रस्तुत गैर सरकारी संगठन के लिए उपस्थित वरिष्ठ वकील संजय पारिख ने कहा कि कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए कानून के तहत प्रदान की गई व्यवस्था पूरी तरह से लागू नहीं की जाती है।

 

2013 अधिनियम के तहत ग्रामीण या आदिवासी क्षेत्रों में हर ब्लॉक, तालुका और तहसील में शहरी क्षेत्रों में वार्ड या नगरपालिका में नोडल अधिकारियों को नियुक्त किया है, ताकि उनके पास आसानी से शिकायते दर्ज कराई जा सके और उस शिकायत पर काम किया जा सके। पारिख ने कहा कि हालांकि संसद ने इस विधेयक को पारित करने के बाद से चार साल बीत चुके हैं। लेकिन अभी तक इसे लागू करने के लिए पूरा ढांचा भी नहीं बना है।