लालू झुक नहीं रहा, रुक नहीं रहा, टूट नहीं रहा…

By संजय यादव
उम्र-70 साल , तीन वर्ष पूर्व ओपन हॉर्ट सर्जरी, डायबटीज से पीड़ित, एक दिन में अनेकों बार दवा, अस्वस्थ शरीर, 21 साल से कोर्ट ट्रायल, नौ बार जेल, तक़रीबन तीन साल सलाखों के पीछे। अब भी कड़ाके की ठंड में जेल में…
मुख्यमंत्री रहते हुए CBI की रेड, मुख्यमंत्री चौड़ी छाती किए अपना आँगन ख़ुदते देख रहा है, बर्तन-बेड-बिस्तर को उलटते देख रहा है। उसे गिरफ़्तार करने के लिए सेना को बुलावा भेजा जाता है। आय से अधिक संपति का केस, हर जगह वह जीतता है।
जब यह क्रांतिकारी योद्धा जेल से बाहर आता है तो दस लाख ग़रीब लोग अपनी शक्ति के प्रतीक लाठी हाथों में लेकर अपने मसीहा को हाथी पर बैठाकर एक जगह एकत्रित होते है। मीडिया उसे खलनायक बनाने के लिए अपने पन्नों को लाल स्याही से रंगती है। केंद्र में बैठी संघी सरकार अपने कट्टर संघी राज्यपाल के माध्यम से उसकी सरकार को बर्खास्ती का पैग़ाम पहुँचाती है लेकिन उसकी फ़ोन पर तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी से एक मिनट की दहाड़ से काँप जाती है।
इस तथाकथित गँवार को क़ाबू में करने के लिए बिहार से केंद्र में भाजपाई सरकार में एक दर्जन कैबिनेट मंत्री बनाए जाते है। सात दिन के लिए अपने संघी प्यादे नीतीश को मुख्यमंत्री बनाते है लेकिन यह गुदडी का लाल सबों को तबियत से ठोंककर 7 दिन में फिर राजा बन जाता है। यह क़ाबू में नहीं आया तो उसकी शक्ति को बाँट बिहार में से एक नया राज्य झारखंड काट दिया जाता है।
देश का सबसे बड़ा संघ परिवार सभी एजेन्सीयों ED/CBI/IT  सहित उन्हें ही नहीं अपितु पत्नी, बेटी, बेटा और सभी नज़दीकियों को परेशान कर रहा है। एक झटके में उसकी सरकार को गिरा दिया जाता है। ताउम्र मीडिया ट्रायल फ़ेस कर रहा है।
लेकिन फिर भी यह माई का लाल झुक नहीं रहा, रुक नहीं रहा, टूट नहीं रहा। झंडा गाड़े फासीवादियों से लड़ रहा है। आपको क्या लगता है लालू प्रसाद यह सब ख़ुद के लिए झेल रहे है। लालू स्वार्थी होता, डरपोक होता, भ्रष्ट होता तो यू-टर्न स्पेशलिस्ट नीतीश कुमार की तरह सहूलियत की राजनीति करता।
लालू जी ख़ुद परेशान नहीं होते लेकिन उनके चाहने वाले करोड़ों ग़रीब ज़रूर परेशान होते है।अगर आप बिहारी नहीं है तो लालू को जानिए ही नहीं बल्कि उनपर स्टडी किजीए,रीसर्च करिए।