बहुजन डायवर्सिटी मिशन दिवस का आयोजन

By रामकरण निर्मल 
25 दिसम्बर भारतीय बहुजन आंदोलन का एक ऐतिहासिक और क्रान्तिकारी दिन है क्योंकि इसी दिन बहुजन आंदोलन के प्रणेता, संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर ने असमानता पर आधारित मनु के विधान मनु स्मृति का दहन कर भारतीय मनुवादी और सामंतवादी समाज को ये सन्देश देने का काम किया था कि अब ये बहुजन समाज आपकी अन्यायवादी व्यवस्था को मनुस्मृति की ही तरह दहन कर देगा। इस परम्परा को आगे बढ़ाते हुए डायवर्सिटी मेन आॅफ इंड़ियाः एच एल दुसााध साहब ने बहुजन डायवर्सिटी मिशन डे दिवस पर आयोजित कामरेड प्रभुदयाल यादव स्मृति शेष, पर डाइवर्सिटी मैन ऑफ द ईयर 2016-2017 का सम्मान वर्तमान समाजिक न्याय आन्दोलन के तीन निम्न योद्धाओं को दिया :-
1. अंतराष्ट्रीय लेखक श्रद्धेय फ्रैंक हुजूर
2. समाजवादी विचारक श्रद्धेय चंद्रभूषण सिंह यादव
3.  बहुजन विचारक डा. कौलेशवर प्रियदर्शी
इन योद्धाओं को सम्मान देकर बहुजन आंदोलन की परिपाटी को आगे बढ़ाने का काम किया गया है और वर्तमान परिदृश्य में ‘बहुजन राजनीति का संकट‘ विषय पर अपने विचार रखने के लिए देश के सर्वोच्च बहुजन बुद्धिजीवी एकत्रित हुए और अपने विचारों से बहुजन आंदोलन को बढ़ाने और बहुजन एकता को मजबूत करने और संघी, फासीवादी विचारधारा को देश से उखाड़ फेंकने के लिए लोगों को समाज हित में छोटे छोटे हितों को त्यागकर बड़े समाजिक हित के लिए एकजुट होने का  आह्वान किया और कहा कि नहीं तो आने वाली पीढ़ी आपसे सवाल जवाब करेंगी की परिवर्तन के समय आप किसके साथ थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डाॅ. अम्बेडकर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल जी निर्मल ने कहा कि समाजिक कार्यकर्ता होने के नाते हम देश प्रदेश की सरकारो को समय-समय पर बहुजन समस्याओं से अवगत कराते रहते हैं। चाहें वो अखिलेश यादव सरकार हों, बहन मायावती की सरकार हों या वर्तमान योगी मोदी सरकार हो। और प्रधानमंत्री से मुलाकात का एक वाक्या बताते हुए उन्होंने कहा कि साहब आप तो चाय बेच सकते थे लेकिन मेरा समाज अछूत होने के नाते चाय भी नहीं बेच सकता इसलिए आप आरक्षित पद पदोन्नति बिल जल्द से जल्द संसद से पास करा उचित प्रतिनिधित्व देने का काम करे और तत्कालीन मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ से मांग की गयी है कि प्रदेश के समस्त सरकारी कार्यालयों, थानों और स्कूलो में बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर की फोटो लगनी चाहिए और उन्होंने इस बात को संजीदगी से स्वीकार करते हुए इसी हफ्ते आदेश जारी करने को कहा उन्होंने कहा कि हम सामाजिक कार्यकर्ता हैं चाहते हैं देश, प्रदेश में बहुजनों का शासन आये लेकिन हम इस इन्तजार में नहीं बैठ सकते कि बहुजनों की सरकारों में ही काम करायें।
प्रो. कालीचरण स्नेही ने कहा कि हमें सिर्फ आप न्यायपालिका दे दीजिए और चाहें सब लें लीजिए।
अन्तर्राष्ट्रीय लेखक फ्रैंक हुजूर ने कहा कि जिस प्रकार यूरोप के पुनर्जागरण काल के  विचारक वाॅलटेयर ने 1789 में फ्रांस की क्रांति में अपनी लेखनी के दम पर वंचित तबकों को उनका हक दिलाने का काम किया है उसी प्रकार भारतीय साहित्यकारों के इतिहास में राजेंद्र यादव के बाद एच एल दुसाध साहब अपनी लेखनी के दम पर सामाजिक परिवर्तन के नायक साबित होंगे।समाजवादी चिंतक चंद्रभूषण सिंह यादव ने कहा कि बहुजन समाज की पार्टियां जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी के फार्मूले पर फेल रहीं हैं।
सर्वेश अम्बेडकर जी ने कहा मान्यवर कांशीराम के आन्दोलन में लाखों युवाओं ने अपना सब कुछ लगाकर आन्दोलन को खड़ा किया लेकिन कुछ लोगों ने उनके त्याग को भुला दिया।
प्रो. रमेश दीक्षित ने कहा कि मैंने अम्बेडकर साहब को पढ़ा और उसी तरह जीने की कोशिश कर रहा हू और भगवाधारी विचारधारा के खिलाफ हमेशा लड़ता रहूंगा।
कार्यक्रम में शामिल होने वालों मे पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद, प्रो. रमेश दीक्षित जी साथ ही क्रांतिकारी साथी एसो. प्रोफेसर डॉ. कौलेश्वर प्रियदर्शी वरिष्ठ सामाजिक कार्यकत्री शिल्पी चैधरी, प्रसिद्ध अन्तराष्ट्रीय लेखक फ्रेंक हुजूर, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं ‘यादव शक्ति‘  पत्रिका के प्रधान सम्पादक चंद्रभूषण सिंह यादव एवं समाजशास्त्री व लेखक एसो. प्रोफेसर कौलेश्वर प्रियदर्शी जी, लाल जी भारती, सर्वेश आंबेडकर, प्रो. कालीचरण स्नेही, डा. राम विलास भारती, राम करन निर्मल, अरशद मश्कि, फर्क इण्डिया के सम्पादक कृष्ण मोहन अखिलेश, प्रेम रंजन उर्फ रंजन, राजबहादुर मौर्या, राजकुमार, राजेश कुमार अतरौलिया आदि उपस्थित रहे और सभी ने अपने विचार व्यक्त किये।
(रामकरण निर्मल, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विधि शोध छात्र हैं)