दिल्ली में हुआ बामसेफ का तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन

आइएनएन भारत डेस्क:
नई दिल्लीः बामसेफ का 22, 23 और 24 दिसंबर को आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन नई दिल्ली के अंबेडकर भवन में 24 दिसंबर को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। 
अधिवेशन के दौरान विभिन्न विषयों पर नौ सत्र आयोजित किये गये जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आये गणमान्य अतिथियों और विषयों के जानकार लोगों ने भाग लिया और बामसेफ अधिवेशन में मौजूद लोगों को संबोधित किया। बामसेफ के अधिवेशन में आये हुए सभी प्रतिनिधियों और वक्ताओं ने बहुजन एकता पर जोर देते हुए भारतीय राजनीति के केन्द्र में बहुजन सवालों के लाने और देश में चल रही हर प्रकार की विषमता को खत्म करने पर जोर दिया। 22 दिसंबर को बामसेफ के अधिवेशन का उद्घाटन बाबासाहेब के पौत्र और पूर्व सांसद बालासाहेब प्रकाश अंबेडकर ने किया।
अधिवेशन का उद्घाटन सत्र ‘‘भारतीय संविधान और संसदीय प्रणाली को मनुवादियों से खतरा‘‘ विषय पर आयोजित था। इस उद्घाटन सत्र की शुरूआत करते हुए प्रकाश अंबेडकर ने कहा कि किस प्रकार से भारतीय राजनीति पर मनुवादियों का कब्जा हुआ है और वो लोग कैसे एक साजिश के तहत भारतीय संविधान को बदलकर उसकी जगह मनुस्मृति में वर्णित नियमों को देश और भारतीय समाज पर थोपना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मनुवादियों की साजिश भारतीय संविधान को मनु विधान से बदलने की और भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की है। उन्होंने बताया कि आरएसएस की योजना अपने सौ साल पूरे होने पर 1925 तक इस कार्य को करने की है। इस सत्र में मुख्य अतिथि यूपी के पूर्व एडीजीपी और आईपीएस बिजेन्द्र सिंह थे। मंच संचालन बामसेफ के राष्ट्रीय महासचिव मोहन भाई परमार ने किया और स्वागत दिल्ली बामसेफ के अध्यक्ष शिव गोविंदजी ने किया। इसके अतिरिक्त इस सत्र में बामसेफ के पूर्व अध्यक्ष बैचरभाई राठौड भी विशेषतौर पर मौजूद थे। सत्र की अध्यक्षता बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंचशील कुंभारे ने की। सत्र में एडवोकेट सुरेश माने और मूलचन्द जी भी मौजूद थे।
अधिवेशन का दूसरा सत्र ‘‘भारतीय लोकतंत्र में न्यायतंत्र की भूमिका शक के घेरे में‘‘ विषय पर आयोजित किया गया। सत्र की अध्यक्षता पंचशील कुंभारे ने की। तीसरा सत्र ‘‘आरक्षण नीति का विरोध एवं संविधान की अवहेलना‘‘ विषय पर आयोजित किया गया। यूपी बामसेफ अध्यक्ष शाहबीर आजाद ने सत्र की प्रस्तावना पेश की।
23 दिसंबर को अधिवेशन की शुरूआत ‘‘सामाजिक परिवर्तन विचारशील संगठन के बिना संभव नही‘‘ विषय पर आयोजित सत्र से हुई। सत्र का संचालन मोहनभाई परमार ने किया। 23 दिसंबर को दूसरा सत्र ‘‘फूले अंबेडकरी विचारधारा से ही भारत राष्ट्र निर्माण संभव‘‘ विषय पर आयोजित किया गया। इस सत्र के मुख्य वक्ता डाॅ. राहुल सिंह थे। डाॅ. राहुल ने अपने संबोधन में बताया कि भारत के समावेशी विकास में सबसे बड़ी रूकावट देश की सामाजिक विषमता है और यह सामाजिक विषमता मनुवादी सोच और हिंदू समाज की वर्ण व्यवस्था के कारण है और जब तक यह वर्ण व्यवस्था बनी रहेगी भोदभाव मिट ही नही सकता है। उन्होंने बताया कि देश में जितने भी विचारक और समाज सुधारक हुए हैं उन्होंने इस वर्ण व्यवस्था को बनाये रखकर ही सुधार की बात की है परंतु यह फूले, पेरियार और अंबेडकर की वैचारिकी ही थी जिसने समस्या की जड़ को समझा और इस मनुवादी वर्ण व्यवस्था को खत्म करने की बात की। डाॅ. राहुल ने कहा कि केवल वर्ण व्यवस्था और सामाजिक भेदभाव खत्म करके ही हम राष्ट्र का समावेशी विकास कर सकते हैं और एक सच्चे भारत राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। यह फूले अंबेडकर की विचारधारा से ही संभव है।
अधिवेशन के चैथे सत्र का विषय ‘‘हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना अखंड़ भारत के लिए घातक‘‘ था। इस सत्र के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद अली अनवर अंसारी थे। जिन्होंने अपने संबोधन में बताया कि किस प्रकार हिंदुत्ववाद की अवधारणा देश की एकता अखण्ड़ता को चुनौती दे रही है। उन्होंने बताया कि भारत एक विचार है और बाबासाहेब ने इसी विचार को मूर्त रूप देने के लिए संविधान की रचना की थी। आज भगवा राजनीति इस भारत के संविधान और भारत के विचार के लिए खतरा बन गई हैं। वे लोगो को विभाजित करके सत्ता हथियाना चाहती हैं और यही बांटने की राजनीति आज समाज में वैमस्य और बैर पैदा कर रही है जो देश की एकता के लिए बड़ा खतरा बन गया है। इस सत्र की अध्यक्षता पंचशील कुंभारे ने की। अन्य वक्ताओं में परमजीत सिंह राणा, अशोक डोंगरे प्रमुख थे।
24 दिसंबर को आयोजित सत्र का विषय ‘‘इंसाफ संगठन के जन आंदोलन द्वारा ही प्रजातंत्र को बचाया जा सकता है‘‘ था। इस सत्र को एडवोकेट आर एस जांगडे, इंसाफ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आशाराम जी, कोषाध्यक्ष रामेश्वर दयाल, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष प्यारे लाल और यूनाईटेड ओबीसी फोरम से जुड़े पत्रकार महेश राठी एवं देवेन्द्र भारती ने संबोधित किया। इस सत्र को राज्यसभा सांसद प्रदीप टमटा ने भी संबोधित किया। प्रदीप टमटा ने अपने संबोधन में विस्तार से बताया कि बहुजनों की लड़ाई एक तरफ ब्राहमणवाद से और दूसरी तरफ पंूजीवाद से है। अगला सत्र मनुवादी शिक्षण प्रणाली बहुजन समाज और राष्ट्र के लिए घातक विषय पर था। अंतिम सत्र का विषय फूले अंबेडकरी प्रतिनिधित्व के बिना संवैधानिक भारत संभव नही विषय पर था। इस सत्र में मुख्य अतिथि बामसेफ के पूर्व अध्यक्ष बैचरभाई राठोड थे। बैचरभाई ने बहुजनों की एकता और बामसेफ के सभी हिस्सों को एक मंच पर आकर काम करने के लिए आहवान किया और इस एकता के लिए अपनी प्रतिबद्धता भी जताई। सत्र और अधिवेशन के अंत में धन्यवाद ज्ञापन बामसेफ के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष डाॅ. राहुल सिंह ने किया।