जातीय कारणों से चारा घोटाले में फिर से दोषी बने लालू यादव

आइएनएन भारत डेस्क:
राँची। सीबीआई की विशेष अदालत ने 23 दिसंबर को चारा घोटाले में फैसला सुनाते हुए 22 में से सात दोषियों को बरी कर दिया और लालू यादव इस मामले में दोषी ठहराये गये। अब आदलत 3 जनवरी को सजा का ऐलान करेगी। सजा सुनाये जाने के बाद एक टीवी चैनल से बात करते हुए राजद नेता शिवानन्द तिवारी ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक केस में दो बार सजा कैसे दी जा सकती है। बता दें कि चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव को पहले भी पांच साल की सजा सुनाई जा चुकी है और इसी आधार पर रांची हाई कोर्ट ने लालू याद को इस मामले में राहत दी थी परंतु सुप्रीम कोर्ट के दखल पर फिर से सीबीआई की विशेष अदालत में यह मामला चलाया गया।


वैसे सीबाीआई के विशेष जज शिवपाल सिंह पर इससे पहले भी पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं और इसी पक्षपात के मद्देनजर लालू यादव के वकील ने जज शिवपाल सिंह की कोर्ट से इस केस को ट्रांसफर करने की गुहार लगाई थी जिसे उपरी आदलत ने अनसुना कर दिया था। हालांकि इसी मामले में बचाव पक्ष के गवाह और पूर्व पुलिस महानिदेशक सुनील कुमार ने जज शिवपाल सिंह पर जाति सूचक शब्दों के इस्तेमाल और उनके बयान को फाडकर फेंकने के गंभीर आरोप लगाये थे। अब जबकि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को इसी केस में बरी कर दिया गया है तो इस फैसले पर सवाल उठने और जातीय भेदभाव के आरोप लगने लाजिमी हैं।


हालांकि चारा घोटाले में फैसला कुछ भी आये परंतु यह भी वास्तविकता है कि इस घोटाले की जड़े बहुत पुरानी और गहरी हैं और जगन्नाथ मिश्रा के जमाने में भी बिहार सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय की इस घोटाले में संलिप्तता जग जाहिर है और इस घोटाले की जांच के आदेश भी लालू यादव ने ही दिये थे। और यही कारण था कि लालू यादव स्वयं को इस पूरे मामले में व्हिसिलब्लोअर कहते रहे हैं।