मुसलमानों के बाद आदिवासी भी होने लगे गौ-रक्षको के शिकार

रांची। मोदीजी का सबका साथ सब का विकास का नारा बड़े पैमाने पर काम कर रहा हैं। गौ-रक्षा के नाम पर पहले मुसलमानों की हत्या की जाती थी। अब इस कड़ी में आदिवासी समाज भी इन गौ-रक्षकों का शिकार होना शुरू हो गया हैं। रांची के नारों गाँव में एक आदिवासी अलमा खलको के साथ बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने गाय का मांस बेचने का आरोप लगा कर बहुत ही बुरी तरह से मारा। अलमा खलको मजूदर हैं और मजदूरी करके अपना पेट पालती है.

खबरों के मुताबिक़ अलमा खलको ने कहा कि गाँव में बजरंग दल के लोगों ने मेरे घर को घेर लिया तथा मेरे पति और मुझे बुरी तरह से मारा पीटा गया। बजरंग दल वालों ने मुझ पर आरोप लगाते हुए कहा की गाय का मांस बेचती हो, जान से मार देंगे। जब इस मामले की शिकायत मैंने थाने में की तो थानेदार ने उलटा मेरे ऊपर की डांट डपट करके थाने से भगा दिया। काफी मशक्कत के बाद थाने में हमारी शिकायत सुनी गई, मगर अपराधियों को पकड़ने के बजाए पुलिस मुझ पर निगरानी रख रही हैं।

आदिवासी समाज के लिए ये पहली घटना नहीं हैं।इससे पहले झारखंड में ही गढवा जिले के बरकोल गाँव में दर्जनों आदिवासियों की जमकर पिटाई की गई थी। इस घटना में 40 वर्षीय रमेश मिंज की मौत हो गई थी।