जेएनयू ने जारी किया तुगलकी फ़रमान

आई एन एन भारत डेस्क:
नई दिल्ली। जेएनयू प्रशासन ने तुगलकी फरमान जारी कर एम फिल पीएचडी इस वर्ष से डिलिंक कर दिया गया हैं।

गौरतलब है कि 1 दिसंबर 2017 को जेएनयू के अकैडमिक कॉउन्सिल ने 2018-19 के शैक्षणिक सत्र में एमफिल/पीएचडी को डिलिंक अर्थात एम फिल से पीएचडी में जाने की सुविधा को हटा दिया गया था। जेएनयू का मानना था की जो छात्र 2018-19 के शैक्षणिक सत्र के एम फिल/पीएचडी में प्रवेश लेंगे उनको केवल एम फिल की ही डिग्री मिलेगी और फिर पीएचडी में प्रवेश के लिए दुबारा जेएनयू के प्रवेश परीक्षा में बैठना पड़ेगा। जबकि अभी तक जेएनयू में एम फिल पीएचडी इंटीग्रेटेड था अर्थात कोई भी छात्र अगर एमफिल में प्रवेश लेता है तो वह एम फिल में एक निर्धारित ग्रेड पाने के बाद पीएचडी में रजिस्ट्रेशन करा सकता था।

ज्ञात हो कि 2018-19 के प्रवेश परीक्षा के प्रोस्पेक्टस में भी जेएनयू ने एम फिल पीएचडी को अलग-अलग नही बताया था। देश के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर छात्रों द्वारा 26 -29 दिसम्बर 2017 को जेएनयू का प्रवेश परीक्षा में भाग लेने जा रहे हैं। जिन छात्रों ने एम फिल/पीएचडी वाले कोर्स में आवेदन किया था उनके एडमिड कार्ड (प्रवेश पत्र) में जेएनयू ने यह ज़ाहिर कर के भेजा है कि छात्र केवल एम फिल कोर्स के लिए ही एलिजिबल (योग्य) है।