हो गई थी ईवीएम मशीनें हैक

आइएनएन भारत डेस्क 
गुजरात चुनावों के नतीजों से ठीक पहले पाटीदार नेता हार्दिक पटेल और कांग्रेस ने ईवीएम मशीनों के हैक हो जाने की आशंका जाहिर कर दी थी। वहीं कामरेज से कांग्रेस उम्मीदवार अशोक जरीवाला ने तो गांधी इंजीनियरिंग कालेज में स्ट्रांग रूम के आपपास वाई-फाई नेटवर्क मिलने की रिपोर्ट भी दर्ज करा दी थी। वैसे जिला प्रशासन द्वारा कहा जा रहा है कि यह नेटवर्क काॅलेज का ही था।
हार्दिक पटेल ने चुनावों परिणामों के आने से पहले कहा था कि भाजपा 140 साफ्टवेयर इंजीनियरों के माध्यम से पांच हजार हैक करेगी। साथ ही चुनाव परिणामों के आने के साथ ही सोशल मीड़िया पर लोगों ने भी दावा करना शुरू कर दिया कि यह भाजपा की नियन्त्रित जीत है और झूठ को ऐसा गढ़ा गया है कि वह सच लगे। अब सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या सही में इन चुनावों में वाई-फाई हैक हुआ है। चुनाव आयोग और उससे भी ज्यादा भाजपा के नेतागण ईवीएम के बारे में दावा करते रहे हैं कि ईवीएम हैक हो ही नही सकती है। परंतु हाल ही में गुजरात के डिप्टी चुनाव आयुक्त के एल परमार ने अपने एक पत्र में माना है कि ईवीएम हैक हो सकती है। 7 दिसंबर 2017 को चुनाव अधिकारी मामलातदार तहसील को भेजे गए एक आदेश पत्र में उन्होंने माना है कि कुछ जगहों पर वाई-फाई के माध्यम से ईवीएम मशीन में लगी माइक्रो चिप को हैक किया जा सकता है और इसीलिए दूरसंचार कंपनियों से कहें कि वे अपने वाई-फाई कनेक्शन को ईवीएम रखे जाने वाली जगहों पर बंद कर दें। उन्होंने इस पत्र में यह भी आदेश दिया कि यदि कंपनियां कनेक्शन बंद करने से इंकार करती हैं तो जबरदस्ती कनेक्शन बंद करवा दिये जायें।

गुप्त आदेश की तरह से जारी किये जाने वाले इस पत्र में ना केवल ईवीएम के हैक होने को रोकने के लिए वाई-फाई बंद करने के आदेश दिये गये हैं बल्कि राजनेताओं द्वारा लोकतंत्र को खतरा पैदा किये जाने पर भी उन्होंने चिंता जाहिर की है। उन्होंने नेताओं द्वारा इस प्रकार के कृत्य करने पर आगाह करते हुए यह भी लिखा है कि नेताओं द्वारा लोकतंत्र और संविधान से इस प्रकार का फ्लर्टेशन अथवा चोंचलेबाजी देश को जल्दी ही अंधेरे में ले जा सकता है।
अब इस प्रकार की घटनाओं और प्रकरण के सामने आने से जाहिर है कि ईवीएम पर लगातार सवालिया निशान लग रहे और जिस प्रकार चुनाव आयोग और मौजूदा चुनाव आयुक्त ए के ज्योति ईवीएम को लेकर अडियल हैं और उनसे भी ज्यादा वह भाजपा ईवीएम को नही बदलने पर अडियल है जिसके अपने नेता 2009 में ईवीएम पर सवाल उठा चुके हैं। जिसमें लालकृष्ण अडवाणी और सुब्रहाम्णयम स्वामी जैसे बड़े नाम शामिल हैं। ऐसे में ईवीएम और मौजूदा चुनावों में नतीजों पर सवाल उठना स्वाभाविक ही है। वैसे मोदीवादी भाजपा झूठ को जितना और जिस तरह से पेश करके सच बनाती हैं उसे देखते हुए हैकिंग की बात को एकदम से निराधार बताकर खारिज भी नही किया जा सकता है। हार्दिक पटेल का कहना कि केवल पांच हजार मशीनों को हैक किया गया है। यह सलेक्टिव हैकिंग का दावा नई चर्चाओं को जन्म देने वाला है।