गैस चैंबर बनती दिल्लीः केन्द्र और दिल्ली सरकार का साझा खेल

आइएनएन भारत
दिल्ली चीन की राजधानी बीजिंग से भी अधिक प्रदूषित हो चली है। देश की राजधानी धीरे धीरे एक गैस चैंबर में तब्दील होती जा रही है। दिल्ली में 85 लाख से अधिक गाड़ियां हर रोज सड़कों पर दौड़ती हैं, जबकि इसमें 1400 नई कारें शामिल होती हैं। इसके अलावा दिल्ली में निर्माण कार्यों और इंडस्ट्री से भी भारी प्रदूषण फैल रहा है। हालांकि इसकी मात्रा 30 फीसदी है, जबकि वाहनों से होने वाला प्रदूषण 70 फीसदी है, परंतु निर्माण कार्यो से उड़ी धूल के कण वाहनों के धूंए को बेहद खतरनाक बना देते हैं। शहर की आबादी हर साल चार लाख बढ़ जाती है, जिसमें तीन लाख लोग दूसरे राज्यों से आते हैं।
आज दुनिया भर में बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण बड़ी चुनौती बन गया है। दिल्ली में तकरीबन 60 लाख से अधिक दुपहिया वाहन पंजीकृत हैं। प्रदूषण में इनकी भागीदारी 30 फीसदी है। कारों से 20 फीसदी प्रदूषण फैलता है। जबकि दिल्ली के प्रदूषण में 30 फीसदी हिस्सेदारी दुपहिया वाहनों की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया के 20 प्रदूषित शहरों में 13 भारतीय शहरों को रखा है, जिसमें दिल्ली चार प्रमुख शहरों में शामिल है।
आबादी का आंकड़ा एक करोड़ 60 लाख से अधिक हो चला है। सरकार का दावा है कि 81 फीसदी लोगों ने ऑड-ईवन फॉर्मूले को दोबारा लागू करने की बात कही है। सर्वे में 63 फीसदी लोगों ने इसे लगातार लागू करने की सहमति दी है। वहीं 92 फीसदी लोगों का कहना था कि उन्हें दो कार रखनी होंगी, वे दूसरी कार नहीं खरीदेंगे।
दिल्ली में उस समय वाहनों से प्रतिदिन 649 टन कार्बन मोनोऑक्साइड और 290 टन हाइड्रोकार्बन निकलता था, जबकि 926 टन नाइट्रोजन और 6.16 टन से अधिक सल्फर डाईऑक्साइड की मात्रा थी, जिसमें 10 टन धूल शामिल है।
इस तरह प्रतिदिन तकरीबन 1050 टन प्रदूषण फैल रहा था। आज उसकी भयावहता समझ में आ रही है। उस दौरान देश के दूसरे महानगरों की स्थिति मुंबई में 650, बेंगलुरू में 304, कोलकाता में करीब 300, अहमदाबाद में 290, पुणे में 340, चेन्नई में 227 और हैदराबाद में 200 टन से अधिक प्रदूषण की मात्रा थी। एक आंकड़े के मुताबिक, भारत में 50 हजार से अधिक लोगों की मौत जहरीले प्रदूषण से हो चुकी है।
परंतु इस जहरीले माहौल और राजधानी के गैस चैंबर बनते जाने की सारी चर्चा के बीच शहर में निर्बाध भ्रष्टाचार से बढ़ने वाले प्रदूषण पर केन्द्र और दिल्ली की सरकार दोनों ही खामोश हैं। अवैध निर्माण से लेकर अवैध पार्किंग और दिल्ली में विभिन्न रूटों और नियमित सेवाओं में दौड़ती यूपी और हरियाणा नम्बर की हजारों बसें, अवैध तरीके चलने वाले और रोजाना दिल्ली के ट्रेफिक को ठप्प करने वाले बैंक्वेट हाल इसी निरंकुश भ्रष्टाचार के कारण फल फूल रहे हैं और राजधानी के प्रदूषण को बिगाड़ रहे हैं। शीघ्र ही आइएनएन भारत राजधानी में प्रदूषण और भ्रष्टाचार पर आलेखों की एक श्रृंखला शुरू करेगा जो केन्द्र और दिल्ली सरकार दोनों की मिलीभगत की पोल खोलकर रख देगा।