इंसानी रिश्तों को मजबूत करती पूर्व पीएम इंद्र कुमार गुजराल की विदेश नीति

नई दिल्ली

इंसानी रिश्तों और मुल्कों के रिश्तें को ऐसे संभाला था जनता दल से पूर्व पीएम इंद्र कुमार गुजराल ने l जिन्हें आज भी याद करती हैं दुनिया. ऐसे गम्भीर और संजीदा राजनेताओं ने भी देश को सम्भाला था, ख़ासकर जनता दल नेता इंद्र कुमार गुजराल और वी पी सिंह ने कई ऐसे ऐतिहासिक फ़ैसले लिए जिससे देश की राजनीतिक तस्वीर ही बदल गयीजहाँ तक विदेश नीति और अपने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से कैसा रिश्ता हो वो इंद्र कुमार गुजराल से वर्तमान नेताओ को सिखना चाहिए,

मीडिया के एक साक्षात्कार में पूर्व प्रधानमंत्री गुजराल साहब ने कहा था ” जब मैं प्रधानमंत्री था, 1997 में यूनाइटेड नेशन के सेशन में मेरे से एक दिन पहले नवाज़ शरीफ़ की तक़रीर थीलिखी हुई तक़रीर थीआधी बातें हिंदुस्तान के बारे में थीये ज़ुल्म हो रहा हैमारा जा रहा है वैगरह वैगरह। अगले दिन मैं बोला था जो स्पीच हमारी मिनिस्ट्री ने ड्राफ़्ट की थी जिसमें पाकिस्तान का ज़िक्र था मैंने उसे लकीर से काट दिया और सारी तक़रीर में पाकिस्तान नाम भी नही लिया। उसके अगले दिन अमरीकी राष्ट्रपति  क्लिंटन ने कहा आपने तो पाकिस्तान का जबाब ही नही दिया,  तो मैंने उनसे कहा मुझे जो जबाब देना है उन्हें दूँगा? ये बहुत छोटी चीज़ है लेकिन इसके मायने बहुत बड़े हैआम अवाम दोस्ती प्यार और मिलना जुलना चाहता हैइंसानी रिश्तो में विश्वास पैदा होता हैये असलियत है की हिंदुस्तान को दो मुल्क बटे 50 60 साल हो गएउन 50-60 वर्षों में ज़्यादातर वक़्त तनाव का थाकम वक़्त दोस्ती का थाये भी असलियत है की पाकिस्तान हिंदुस्तान के अलग होने से पहले मुस्लिम लीग और कोंग्रेस में तनाव थावह क़रीब 30-40 वर्ष पुराना थाजो गाँठे 100 वर्षों में बांधी गयी हैजैसे पंजाबी में हमारे यहाँ कहते है जो गाँठ हाथ से बांधी जाय वो दाँत से खोलनी पड़ती हैयहाँ आम आवाम की राय दोस्ती की है लेकिन सिर्फ़ दोस्ती कहने से दोस्ती नही बनती उसके लिए क़दम उठाने पड़ते है।
आशिक़ी शबरतलब और तमन्ना बेताब दिल का क्या रंग करूँ ख़ूनी जिगर होने तक वक़्त लगेगा”।
अज़ीम शख़्शियत गुजराल साहब आप हमेशा याद किए जाएँगे। एक बेहतर इंसान और एक प्रधानमंत्री के रूप में।

By अमित कुमार,रिसर्च स्कॉलर जेएनयू