लालू का सामाजिक सौहार्द का संदेश, बाबरी विध्वंस से बिगड़े माहौल में।

-By अमित कुमार:
मंडल आंदोलन ने भारतीय राजनीति की दिशा ही बदल दी। वी पी सिंह जी के नेतृत्व में जनता दल की सरकार ने अपने छोटे से अंतराल में कई ऐतिहासिक और साहसिक फ़ैसले लिए, वंचित समुदाय से आने वाले संविधान निर्माता बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर जी को मरणोप्रान्त भारत रत्न से सम्मानित,आज़ादी के बाद पहली बार मुस्लिम समाज से आनेवाले मुफ़्ती मोहम्मद सईद देश के गृह मंत्री बने। इस से पूर्व जनता पार्टी और चौधरी चरण सिंह जी के प्रधानमंत्रित्व काल में देश में पहली बार मुस्लिम समाज से आनेवाले ऐयर चीफ़ मार्शल आई ऐच लतीफ़ थे। मंडल आंदोलन के बाद पूरे देश में सदियों से सत्ता पर एकाधिकार को अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझने वाले सामंती वर्ग अपना ज़मीन उखरता देख एक साज़िश के तहत मँजहबी ज़हर फैलाने के लिए बाबरी मस्जिद को गिरा दिया। बिहार के अलावा पूरा देश साम्प्रदायिक दंगो की चपेट में आ गया। बिहार में लालू जी के नेतृत्व में जनता दल की सरकार चल रही थी। छह दिसम्बर को लालू जी ने भाजपा पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था । बाबरी मस्जिद को गिराकर साम्प्रदायिक शक्तियों ने पूरे विश्व में भारत को कलंकित किया है। 30 जनवरी यदि राष्ट्रीय शोक का दिवस है तो 6 दिसम्बर राष्ट्रीय शर्म का दिवस होना चाहिए। उन्होंने आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से प्रदेश की जनता को सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।

उस अपील के कुछ अंश:

बिहारवासी भाइयों एवं बहनों, आप सभी जानते है की वर्षों की ग़ुलामी को काटने के लिए हमारे नेताओ ने हमारे पुरखो ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर, डॉ० लोहिया, जय प्रकाश नारायण, युसफ मेंहर अली और देश की जनता चाहे कश्मीर की हो या कन्याकुमारी की, सभी जात, सभी धर्मों के लोगों ने भारत को आज़ाद कराने के लिए बड़ी भारी क़ुर्बानी देने का काम किया था और आपसी एकता और हमारे पुरखो की क़ुर्बानी की वजह से देश आज़ाद हुआ।

अपने संबिधान में जो पिछड़े भाई है, दबे कुचले लोग है, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति के लोग हैं। उनके लिए व्यवस्था की थी हमारे पुरखो ने कि हम इनको सेवाओं में विशेष अवसर देंगे, आरक्षण की व्यवस्था दी थी। यह देश सबो का देश है, यह धर्मनिरपेक्ष देश है, अलग भाषा अलग बोली। हर मँजहब का समान आदर किया जाएगा।लेकिन 45 साल की आज़ादी और हमारी क़ुर्बानी को इस देश में भाजपा, आरएसएस, वीएचपी ने राम रहीम का बखेड़ा उठाकर, धर्म को राजनीति से जोड़कर, अयोध्या में जो करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक था बाबरी मस्जिद। उसे ढाहने का काम किया।इससे न केवल करोड़ों अक्लियत के लोगों के,धर्मनिरपेक्ष जनता के मन में दुःख और शोक,भय की लहर फैल गई। हम भारत के लोग दुनिया में कोई उत्तर देने की स्तिथति में नहीं है।

बाबरी मस्जिद पर किया गया प्रहार देश के लोकतंत्र एवं धर्मनिरपेक्षता पर किया गया प्रहार हैं। हम सभी मर्माहत है और कभी भी इसे चुपचाप देखते नही रह सकते। भारत की जनता में वह ताक़त हैं, जिनसे बेमिसाल ताक़त वाली वर्तानवी हुकूमत को उखाड़ फेंका। इमर्जेंसी लागू करने वाली ताक़त को धूल चटा दी। और शिलान्यास करने की छूट देनी वाली सरकार के पाए ढाह दिए। हम इस मामले को देश की अमनपसंद जनता की अदालत में ले जा रहे है और जिन लोगों ने हमारी उम्मीदों पर पानी फेरा है। उनके मंसूबों को भी हम सत्य और अहिंसा के बल पर चकनाचुर कर देंगे। मैं आपलोगो को पूरा यक़ीन दिलाता हूँ कि फ़िरक़ापरस्त लोगों को किसी क़ीमत पर कामयाब नही होने दिया जाएगा।

आपसे हमारी अपील है हर गाँव, शहर गली और मुहल्ले खेत और खलिहान में शांति और सधभावना, दोस्ती और भाईचारा का माहौल बनाए रखे। बिहार से ही सदभावना का संदेश पूरे देश में फैला। पूरे देश को एकजुट होकर माला में गुथने की ज़िम्मेवारी आप सभी के कंधों पर है। हम आपसे आपका सहयोग चाहते है। सरकार ने हर जगह निगरानी रखी है। शासन को हिदायत दी गई है कि जहाँ भी कोई बलबाई हो चाहे वो किसी धर्म किसी मँजहब का मानने वाला हो, उससे सख़्ती बरती जाय। दंगा फ़साद को हम बर्दाश्त नही करेंगे।

इन्हीं शब्दों के साथ हम सभी भाइयों बहनो को इकट्ठे नमस्कार , जय हिंद आदाब सलाम करके अपनी बात को समाप्त करते है।
7 दिसम्बर 1992 को प्रसारित इस संदेश ने पूरे बिहार कि फ़िज़ा बदल दी। सांप्रदायिक सद्भभाव के मामले में बिहार अग्रणी हो गया।

-अमित कुमार, शोध छात्र, जवाहरलाल नेहरु विश्विद्यालय